अध्यापक डाक्टर सिरस ने एक शांत एवं सुखमय जीवन बिताने की कोशिश करी थी, उनका स्वाभाव ऐसा था के वे न तो किसी से बैर करते न ही किसी के मतलब से मतलब रखते| हाँ अगर किसी को उनके मदद की आवश्यकता होती तो वोह कभी पीछे नहीं हटते|
हमारे सिक्षा पद्धति एवं अलीगढ मुस्लिम विस्वविद्यालय के लिए एक शर्मनाक बात है की ऐसे एक व्यक्ति को श्रद्धा तो दूर, उन्होंने उन के अधिकारों को तिलांजलि देते हुए उन पर कई झूटे एवं अवांछित तिरस्कार लगाये| उन्हें अनैतिक तौर से निलंबित किया गया| उन के व्यक्ति स्वाधीनता एवं स्वाइततत्ता को तिलांजलि देकर विस्वविद्यालय ने उन के घर में घुस कर उनकी तस्वीर ली| जहाँ एक विस्वविद्यालय की यह नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है के वे एक खुले विचारधारा तथा नागरिक एवं व्यक्ति अधोकारों के लिए श्रद्धा, जैसे उसूलों को अपने छात्रों में प्रेरित करें, वहीँ अलीगढ मुस्लिम विस्वविद्यालय ने अपने छात्रों को एक अध्यापक के खिलाफ उन के घर में दंडनीय घुसपैट, गुंडागर्दी, झूठे अफ्वाह्वाद, जैसे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया| केवल इतना ही नहीं, उपाध्यक्ष पद के व्यक्ति ने भी ऐसे छात्रों की सराहना की|
जब सत्य की विजय हुई और इलाहाबाद उच्चा न्यालय ने अध्यापक सिरस को अपने कर्यछेत्र में पुनर्स्थापित किया, तो यह स्वाभाविक है के वाही लोग, विस्वविद्यालय के उपाध्यक्ष से लेकर सारे अन्य अधिकारी जो सिरस के खिलाफ साजिस में सम्मिलित थे, वे उन्हे क्षति पहुँचने की कोशिस करे|
ऐसे परिस्थिति में अध्यापक सिरस के अकाल मृत्यु का समाचार हमे मिला| एक निर्मल एवं भला व्यक्ति हमारे बीच नहीं रहे| मगर उन के मृत्यु को आत्महत्या कह कर हम इस पूरे मसले को टालने नहीं देंगे| सम्भावित है की उन की हत्या हुई हो| सम्भावित है के अलीगढ मुस्लिम विस्वविद्यालय के उच्च्पदिया अधिकारी उन के मृत्यु के षड़यंत्र में शामिल हों| इन सभी मसलों की संपूर्ण जांच निष्पक्ष तरीके से करवाना ही पड़ेगा, यह हमारी एकमात्र मांग है|
अध्यापक सिरस हमारे मन में अमर रहेंगे||
– आदित्य बन्द्योपाध्याय (Aditya Bondyopadhyay)


